06/01/2023
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनायज़ेशन के मुताबिक, खराब ओरल हेल्थ के कारण हृदय रोग, गर्भधारण और जन्म से जुड़ी समस्याएं, निमोनिया, डायबिटीज, हडि्डयों से जुड़े रोग ऑस्टियोपोरोसिस और अल्जाइमर्स का भी खतरा अधिक होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, ओरल हेल्थ दुनिया में बड़ी समस्या है। 60-90 प्रतिशत स्कूली बच्चे और युवाइससे पीड़ित हैं !
मैं डॉ. प्रवीण मिश्रा बता रहा ओरल हेल्थ को बेहतर बनाने के तरीके...
ओरल हेल्थ की सुरक्षा के 4 तरीके
1) ब्रश कब ना करें: खट्टा खाने के 30 मिनट बाद तक
जॉनसन एंड जॉनसन कंज्यूमर इंकॉर्पोरेशन में ग्लोबल डायरेक्टर ऑफ ओरल केयर डॉ. माइकल लिंच कहते हैं, खट्टे फल और जूस के बाद दांतों का इनेमल मुलायम पड़ जाता है। तुरंत ब्रश करने से नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए 30 से 60 मिनट बाद ही ब्रश करना चाहिए।
2) सफाई कैसे करें: 45 डिग्री एंगल से, चार हिस्सों में बांटकर
दांतों की सफाई मुंह के पिछले हिस्से से शुरू करें। मुंह को चार हिस्सों में मानते हुए इसे टॉप लेफ्ट, टॉफ राइट, बॉटम लेफ्ट और बॉटम राइट में बांट लें। ब्रश को लगभग 45 डिग्री एंगल पर रखें। यानी ब्रश आधा मसूड़ों पर और आधा दांतों पर होना चाहिए। हर सेक्शन में 30 सेकंड तक सफाई करें।
3) क्या ज्यादा खाएं: कच्चे और रेशेदार फल का इस्तेमाल बढ़ाएं
कच्चे और रेशेदार फल जैसे सेब, नाशपाती, गाजर, दांतों की सतह को स्क्रब करते हैं। इससे प्लाक निकल जाता है। इन्हें चबाने में भी समय लगता है, जिससे लार बनती है जो एसिड को बेअसर करती है।
4) क्या कम खाएं: सोडा, स्पोर्ट्स ड्रिंक और जंक फूड से बचें
शुगर वाली चीजें सबसे ज्यादा नुकसानदायक हैं क्योंकि प्लाक के बैक्टीरिया इसी से एसिड बनाते हैं। केचअप, सोडा, स्पोर्ट्स ड्रिंक, फ्लेवर्ड योगर्ट, पास्ता सॉस यानी जंक फूड कम से कम खायें ।
इन तीन ख़तरों को आप रोक सकते हैं
1) दिल को खतरा: खराब डेंटल हेल्थ से रक्त प्रवाह में बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है, जो हृदय के वाल्व को प्रभावित कर सकता है। दांतों के टूटने के पैटर्न का भी दिल की धमनियों से संबंध होता है।
2) कैंसर: वेब एमडी के मुताबिक, खराब ओरल हेल्थ वाले लोगों में ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) से मुंह के संक्रमण का खतरा अधिक होता है, जो बाद में मुंह के कैंसर का कारण बन सकता है।
3) डायबिटीज: इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के मुताबिक, खराब मसूड़े एक समय के बाद ब्लड ग्लूकोज लेवल को प्रभावित करना शुरू कर देते हैं। इससे मधुमेह तेजी से बढ़ने लगता है। अथवा पहले से पीड़ित मरीज की स्थिति और खराब होने लगती है।