02/06/2024
https://youtu.be/4lPnD20y_pc?si=GBgOFfM3HKM3VFN3
✍️ ????? *किसी मंगल कार्यक्रम में नाश्ता, लंच या डिनर नहीं रखा गया हो, और फिर भी मेहमानों का अद्भुत स्वागत कैसे किया जा सकता है ?*
आज मेरी आयु 77 वर्ष की है और जब मैं 7 वर्ष का था, तब से मेरे पूज्य पिताजी ने मुझे ईमानदारी से धन कमाने की शिक्षा देना शुरू कर किया था और तब से ही मैंने धन कमाना शुरू भी कर दिया था।
इसलिए मैं धन की महत्ता समझता हूं, कि ईमानदारी और मेहनत से धन कैसे कमाया जाता है?
और कैसे जोड़ा जाता है?
और कैसे उचित समय पर सदुपयोग में लिया जाता है?
इसी तरह से अपने जीवनकाल में, मैंने हजारों *मंगल आयोजन* देखें और किए।
परंतु जितना अधिक आनंद मुझे *शुक्रवार, 17 मई, 2024* को आया, उतना अधिक आनंद पहले कभी नहीं आया।
प्रत्येक मंगल आयोजन में लंच या डिनर पर बुलाया जाता है तो मेजबान को यह चिंता सताती रहती है कि यदि मेहमान अधिक आ गए तो खाद्य सामग्री कम पड़ जाएगी और यदि मेहमान कम आए, तो जो भोजन तैयार किया है, उसका क्या होगा?
वह तो फालतू चला जाएगा।
यदि होटल में भी लंच या डिनर का आयोजन करते हैं, तो भी यह धुक धुक लगी रहती है कि मेहमान कम आए, तो होटल वाले को तो M.G. यानि मिनिमम गारंटी देना ही पड़ेगी। फालतू में अधिक बिल चुकाना पड़ेगा। इसलिए अधिकतर लोग शादी विवाह के कार्ड घर-घर जाकर बांटते हैं और गिड़गिड़ाकर कहते हैं कि आप हमारे यहां जरूर पधारना।
सभी मेहमान लोग *हां भर देते हैं कि हम जरूर आएंगे,*
परन्तु जिस दिन आयोजन होता है, उस दिन मेजबान का दिल धक-धक करता रहता है, क्योंकि हां भरकर नहीं आने वालों का क्या किया जाए?
17 मई 2024 को मैं बहुत खुश था कि आज तो जो कोई भी मेहमान आए, तो उसका बहुत आभारी रहूंगा और यदि कोई व्यक्ति नहीं आए तो उसके प्रति मन में कोई राग द्वेष उत्पन्न नहीं होगा कि वह क्यों नहीं आया?
उस दिन कम मेहमान आने पर बनाई गई भोजन सामग्री व्यर्थ चली जाएगी,
ऐसा कोई डर नहीं सता रहा था।
*जो आए, उसका भला, जो नहीं आए, उसका भी भला।*
ऐसी मंगल कामनाएं सब के प्रति मन में हो रही थी।
मैंने जो भी अतिथि आए, उनका स्वागत, संसार के सबसे मीठा शहद *लीची का शहद, 500 ग्राम की पैकिंग* में भेंट कर उनका पूरा सम्मान किया। उन्होंने आडिटोरियम में बैठकर 3 घंटे की हमारी फिल्म देखी और *महादेव जी की चार कन्
Honey