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दांत की सफाई और रोगों से जुड़ी ये 5 अफवाहें बढ़ा रही हैं कई रोगों का खतरा, जानें इनकी सच्चाई। दांतों की सेहत का ध्यान रख...
09/05/2022

दांत की सफाई और रोगों से जुड़ी ये 5 अफवाहें बढ़ा रही हैं कई रोगों का खतरा, जानें इनकी सच्चाई।

दांतों की सेहत का ध्यान रखना शरीर में होने वाले अन्य बीमारियों को भी रोक सकता है। इसलिए भी कहा जाता है कि दांत में हो रहे छोटे से दर्द को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे में हमें समय-समय पर दांतों की सेहत का ख्याल रखने के लिए डेंटल चेकअप के लिए जरूर जाना चाहिए। वहीं कुछ लोगों के अंदर दांतों से जुड़े कुछ मिथक भी हैं, जिसके कारण उन्हें लगता है कि दांत निकलवाना से उन्हें कुछ अन्य परेशानियां होंगी। पर ऐसा कुछ नहीं है। दांतों को अच्छे ले साफ करना और दर्द होने पर डाक्टर को दिखाना यह सब एक नॉर्मल प्रोसेस का हिस्सा है। इसके न आपके ब्रेन को कोई नुकसान पहुंचेगा न आपकी आंखों को कोई नुकसान होगा। ऐसे ही मिथकों से हर दिन डेंटिस्ट भी परेशान होते हैं, जबकि इनका विज्ञान में कोई आधार नहीं है। आइए हम आपको बताते हैं दांतों से जुड़े 5 सामान्य मिथकों के बारे में, जिसपर आपको भरोसा नहीं करना चाहिए।

मिथक 1: चिकित्सकीय सफाई सेंस्टिविटी का कारण बन सकती है
तथ्य: दांतों की सफाई या स्केलिंग एक प्रक्रिया है, जो दांतों की सतह पर जमे हुए बैक्टीरिया को साफ और दांतों के अधिक सख्त होने की स्थिति में इलाज करवाने के लिए आवश्यक होती है। इसके अलावा इस प्रक्रिया से दांतों के मसूड़ों को फिर से भरने में मदद मिलती है। स्केलिंग उन दांतों के क्षेत्रों को उजागर करती है, जो पहले टारटर से ढके हुए थे, इस प्रकार दांत की जड़ों को हल्का सा निकाल कर करते हैं। इससे दांतों में झंझनाहट या सेंस्टिविटी हो सकती है, जो एक या दो दिन में ठीक हो जाती है। पर लोगों के अंदर इसे लेकर एक मिथक यह है कि स्केलिंग करवाने से उनके दांत हमेशा के लिए सेंस्टिव हो जाते हैं। इसी डर से बहुत लोग स्केलिंग करवाने ले डकते हैं, जबकि ऐसा कुछ नहीं है। यह बस एक सफाई की प्रक्रिया है और कुछ नहीं। इससे आपके दांत साफ और उनकी जड़ें दर्द मुक्त हो जाती हैं।

मिथक 2: आंखों पर असर होता है
तथ्य: बहुत से लोगों में यह मिथक घर कर गई है कि ऊपरी जबड़े से दांत निकालने से उनकी आंखें खराब हो सकती हैं। जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है। ऊपरी जबड़े से दांत निकालने से आंखों पर कोई असर नहीं पड़ता है। आंखों से जुड़ी नसों में ऑप्टिक, ऑक्यूलोमोटर, पेट की नसें और ट्राइक्लियर नसें होती हैं, जबकि ऊपरी जबड़े से संबंधित नसें पीछे से होती हैं, जिन्हें वायुकोशीय, तालुमूल, नासापुटैलिन और इंफ्रोरबिटल कहा जाता है। इस तरह ऊपरी जबड़े की नसें आंख की नसों से पूरी तरह से अलग होती हैं। पर लोगों को लगता है कि दांतों की नसें आंखों से जुड़ी होती हैं और दांत निकलवाने से हमारी आंखें भी खराब हो जाती हैं।
मिथक 3: विस्डम टिथ को हटाने से मस्तिष्क प्रभावित होता है
तथ्य: विस्डम टिथ दोनों जबड़े के दोनों तरफ तीसरे और अंतिम दाढ़ होते हैं। वे 18 से 26 वर्ष की आयु के बीच फूटते हैं। चूंकि वे आमतौर पर अन्य दांतों की तुलना में बहुत बाद में दिखाई देते हैं, एक ऐसी उम्र में जहां लोग शायद समझदार होते हैं, इसलिए उन्हें विस्डम टिथ भी कहा जाता है। इसे लेकर मिथक है कि इसे हटाने से मस्तिष्क पर प्रभाव पड़ता है, जबकि ऐसा कुछ नहीं होता।

मिथक 4: दांतों को सख्त ब्रश से साफ करें
तथ्य: जोरदार ब्रश करने से आपके दांत साफ नहीं होंगे, लेकिन इससे घर्षण हो सकता है। गलत ब्रश करने से दांतों की सतह खराब होती है। यह गंभीर सेंस्टिविटी को जन्म दे सकता है। जब आपके दांतों को ब्रश करने की बात आती है, तो आप जिस तरह से दांत साफ करते हैं, वह अधिक मायने रखती है। अगर आप उसे सख्त ब्रश से बहुत तेजी से साफ करेंगे, तो इससे आपको दांत खराब होंगे। इसलिए हमें हमेशा ही सोफ्ट ब्रश का चुनाव करना चाहिए और ब्रश करते वक्त बहुत आराम से दांतो को साफ करना चाहिए।
मिथक 5: मसूड़ों से खून आने पर ब्रश न करना
तथ्य: ब्लिडिंग गम्स यानी कि मसूडों से खून निकलने की परेशानी। यह अक्सर मसूड़ों में सूजन आ जाने के कारण होती है। दरअसल दांत के आसपास के मसूड़ों में प्लाक जमा होने के कारण ब्लीडिंग होती है और डेंटिस्ट जिंजिवाइटिस में डेंटल स्केलिंग के बाद उचित ब्रश करने की सलाह देते हैं। पर लोगों को यह लगता है कि अगर आपके मसूड़ों में सूजन में है, तो आपको ब्रश नहीं करना चाहिए, जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है।

गाल में छाले और मुंह में घाव हैं मुंह के कैंसर के शुरुआती लक्षण, जानें किन्हें होता है खतरामुंह के कैंसर के रोगी सबसे ज्...
25/01/2022

गाल में छाले और मुंह में घाव हैं मुंह के कैंसर के शुरुआती लक्षण, जानें किन्हें होता है खतरा
मुंह के कैंसर के रोगी सबसे ज्यादा भारत में पाए जाते हैं। इसका कारण यह है कि यहां बड़े पैमाने पर लोग गुटखा, पान मसाले और सुर्ती आदि का सेवन करते हैं।
मुंह के कैंसर के रोगी सबसे ज्यादा भारत में पाए जाते हैं। इसका कारण यह है कि यहां बड़े पैमाने पर लोग गुटखा, पान मसाले और सुर्ती आदि का सेवन करते हैं। मगर यदि आप ये समझ रहे हैं कि सिर्फ तंबाकू खाने वालों को मुंह का कैंसर होता है, तो आप गलत हैं। मुंह का कैंसर यानी ओरल कैंसर किसी को भी हो सकता है। आमतौर पर इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा तंत्र) के कमजोर होने पर ये कैंसर हो जाता है।
मुंह का कैंसर होने पर शुरुआत में बहुत सामान्य संकेत दिखते हैं, जैसे- मुंह में गाल के अंदर की तरफ छाले होना, मुंह में छोटे-मोटे घाव होना, लंबे समय तक होठों का फटना और घाव का आसानी से न भरना आदि। आइए आपको बताते हैं मुंह के कैंसर के बारे में कुछ अन्य जरूरी बातें, जिससे आप इस बीमारी से समय रहते बच सकें।
भारत में कितनी तेजी से बढ़ रहा है ओरल कैंसर
कैंसर एक जानलेवा रोग है। भारत में पिछले एक दशक में कैंसर के मरीजों की संख्या और कैंसर से मरने वालों की संख्या दोनों बहुत तेजी से बढ़े हैं। जर्नल ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज एंड रिसर्च की मानें तो, आपको जानकर हैरानी होगी कि कैंसर के जितने मामले भारत में आते हैं, उनमें से 30 प्रतिशत सिर्फ मुंह के कैंसर (ओरल कैंसर) के मामले होते हैं। भारत में हर घंटे ओरल कैंसर से 5 से ज्यादा लोगों की मौत होती है। ये वो आंकड़ें हैं जो कैंसर के लिए अस्पतालों में रजिस्टर किए गए हैं। यानी वास्तविक आंकड़े इससे भी कहीं ज्यादा हो सकते हैं। इनमें से सबसे ज्यादा मामले उत्तरप्रदेश से आते हैं और गांवों से आते हैं।
क्या हैं मुंह के कैंसर के शुरुआती लक्षण
मुंह के कैंसर की शुरुआत मुंह के अंदर सफेद छाले या छोटे-मोटे घाव से होती है।
लंबे समय तक अगर मुंह के भीतर सफेद धब्बा, घाव, छाला रहता है, तो आगे चलकर यह मुंह का कैंसर बन जाता है।
मुंह में दुर्गन्ध, आवाज बदलना, आवाज बैठ जाना, कुछ निगलने में तकलीफ होना, लार का अधिक या रक्त मिश्रित बहना जैसे लक्षण भी दिखते हैं।
धूम्रपान या नशा करने वाले को कैंसर होने का खतरा ज्यादा रहता है। मुंह का कैंसर मुंह के भीतर जीभ, मसूड़ें, होंट कहीं भी हो सकता है।
इसमें घाव, सूजन, लाल रंग, खून निकलने, जलन, सन्नता, मुंह में दर्द आदि जैसे लक्षण देखने को मिलते है।
किन लोगों को होता है ज्यादा खतरा
आमतौर पर मुंह का कैंसर कमजोर इम्यूनिटी के कारण होता है इसलिए किसी को भी हो सकता है। इसके अलावा मुंह की ठीक से सफाई न करने से भी लंबे समय में मुंह के रोग और फिर कैंसर हो सकता है। मगर फिर भी इसका सबसे ज्यादा खतरा उन लोगों को होता है, जो तंबाकू या उससे जुड़ी चीजें जैसे- गुटखा, सुर्ती, जर्दा, पान, सुपारी, पान मसाला आदि खाते हैं।

इसके अलावा बीड़ी, सिगरेट, गांजा, शराब, आदि का सेवन भी मुंह के कैंसर का कारण बनता है।
मुंह के कैंसर से बचना है तो क्या करें
यदि मुंह, होंठों या जीभ पर किसी तरह का घाव या छाला बन जाए और शीघ्र ठीक नहीं हो रहा हो तो तुरन्त चिकित्सक को दिखाना चाहिए। यदि मुहं में होने वाले कैंसर का पता प्रथम चरण में ही चल जाए तो इसका निदान संभव है। इसमें देरी करने पर इसकी भयावहता बढ़ जाती है। इसके अलावा अगर कोई लक्षण नहीं भी दिखाई दें, फिर भी इन बातों का जरूर ध्यान रखें।

धूम्रपान एवं नशे का सेवन ना करें।
दांतों और मुंह की नियमित दो बार अच्छी तरह सफाई करें।
दांतों मसूड़ों व मुंह के भीतर कोई भी बदलाव नजर आए तो तत्काल डॉक्टर से जांच करायें।
जंक फूड, प्रोसेस्ड फूड, कोल्ड ड्रिंक्स, डिब्बा बन्द चीजों का सेवन बन्द कर दें।
ताजे मौसमी फल, सब्जी, सलाद अवश्य खाएं। इन्हें अच्छे से धोकर उपयोग करें।
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