14/04/2026
🩺 -5 की रिपोर्ट: हर दूसरी महिला #एनीमिया की शिकार
📊 #भारत में 15 से 49 वर्ष की महिलाओं में एनीमिया एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-5) के अनुसार, राजस्थान में 54.4% महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं, जबकि कुछ राज्यों में यह आंकड़ा 50 से 70 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।
📍 पश्चिम बंगाल (71.4%) में स्थिति सबसे खराब है, वहीं त्रिपुरा, असम, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों में भी हालात बेहद चिंताजनक हैं। यह दिखाता है कि पोषण और स्वास्थ्य योजनाओं के बावजूद समस्या अभी भी व्यापक रूप से बनी हुई है।
🥗 विशेषज्ञों के अनुसार, एनीमिया का मुख्य कारण आयरन और पोषण की कमी, गर्भावस्था के दौरान सही देखभाल का अभाव और जागरूकता की कमी है। बदलती जीवनशैली और खराब खान-पान भी इस समस्या को बढ़ा रहे हैं। खासकर ग्रामीण और गरीब वर्ग की महिलाओं में संतुलित आहार की कमी के कारण यह स्थिति ज्यादा गंभीर हो जाती है।
⚠️ #खून_की_कमी का सीधा असर शरीर पर पड़ता है - जैसे कमजोरी, थकान, चक्कर आना और काम करने की क्षमता में कमी। गर्भवती महिलाओं के लिए यह और भी खतरनाक है, क्योंकि इससे प्रसव के दौरान जोखिम और जटिलताएं बढ़ जाती हैं। लंबे समय तक एनीमिया रहने से महिलाओं के स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ी दोनों पर असर पड़ता है।
✨ महिलाओं में पोषण की कमी केवल गरीबी या संसाधनों की कमी से नहीं आती। इसका असली कारण पितृसत्तात्मक अनुकूलन (Patriarchal Conditioning) है। समाज ने महिलाओं के मन में यह बैठा दिया है कि उनका शरीर उनका अपना नहीं, बल्कि परिवार की अमानत है। उन्हें सिखाया गया है कि परिवार की सेवा ही सबसे महत्वपूर्ण है। घरों में महिलाएं सबको खिलाने के बाद अंत में बचा-खुचा खाना खाती हैं।
🚫 बिना ज्ञान के किया गया ‘त्याग’ केवल हिंसा है। यदि कोई महिला स्वयं को भूखा रखकर या कुपोषित रखकर परिवार की सेवा कर रही है, तो वह न तो अपना भला कर रही है और न ही परिवार का।