12/06/2023
प्रभु श्री राम की महिमा को मुस्लिम शायर ज़फ़र अली ख़ां ने कुछ यु लिखा है।
न तो नाक़ूस से है और न असनाम से है
हिंद की गर्मि-ए-हंगामा तिरे नाम से है
(न ही शंख से है और न ही मूर्तियों से है। हिंद में धूमधाम तुम्हारे नाम से है)
मैं तिरे शेव:-ए-तसलीम पे सर धुनता हूं
कि यह इक दूर की निसबत तुझे इस्लाम से है
(तुम्हें अपनी आज्ञाकारिता के कारण कितने कष्ट उठाने पढ़े थे)
हो वो छोटों की इताअत कि बड़ों की शफ़क़त
ज़िंदा दोनों की हक़ीक़त तिरे पैगान से है
(तुमसे छोटों के लिए वात्सल्य और बड़ों का आज्ञापालन दोनों सीखे जा सकते हैं)